Ishwar Quran ke Surah Maoon me batata hai ; 1. अ-र ऐतल्लज़ी युकज्जिबु बिद्दीन क्या तुमने उसे देखा जो दीन–धर्म को झुठलाता है? 2 . फ़ ज़ालिकल्लज़ी यदु अल्-यतीम वही तो है जो अनाथ को धक्के देता है, 3. वला यहुज्जु अला तआमिल मिस्कीन और मुहताज के खिलाने पर नहीं उकसाता 4. फवैलुल् लिल्-मुसल्लीन अतः तबाही है उन नमाज़ियों/भक्तो/पुजारियों के लिए, 5. अल्लज़ी-न हुम अन् सलातिहिम् साहून जो अपनी नमाज़/भक्ति/पूजा से ग़ाफिल (असावधान, असचेत) रहते हैं, 6. अल्लज़ी-न हुम् युराऊ-न जो दिखावे के लिए कार्य/कर्म करते हैं, 7. व यम नऊनल माऊन और साधारण/आम इस्तेमाल की चीज़ों को रोकते है (या किसी को देते नहीं ) Note; Quran ya Dharm-Granthho me - jo Buro ki Harqate batayi gayi hai Ham Sab ko bhi unse bachna hai Aur jo Acho ki bate batayi gayi hai unhe Apnana hai .